9mm CARBINE MACHINE GUN (CMG)
📌 परिचय (Introduction)
9mm Carbine Machine Gun (CMG) भारतीय सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों मे प्रधान आरक्षण/ हवालदार का यक्तीगत हाथीयार है. ये ब्लो बॅक के सिद्धांत पर काम करता है. लंबे समय से सेवा दे रही हथियार है। यह मुख्य रूप से क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB), VIP सुरक्षा, कमांडो ऑपरेशन्स और अंदरूनी सुरक्षा ड्यूटी के लिए इस्तेमाल की जाती है।
यह हथियार ब्रिटिश Sterling Submachine Gun का भारतीय लाइसेंस उत्पादन संस्करण है, जिसे भारतीय सेना में 9mm 1A1 Carbine नाम से जाना जाता है। अपनी compact size, reliability और 9mm Parabellum कारतूस की अच्छी मारक क्षमता के कारण यह कई दशकों तक भारतीय बलों की पसंदीदा हथियार रही है।
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🌍 उत्पत्ति (Origin)
कार्बाइन मोटे तौर पर सब मशीन गन की श्रेणी में आता है। एस.एम.जी. की श्रेणी में वे हथियार शामिल किए जाते हैं जिनमें स्वचालित पिस्तल की विशेषताएँ हों। लेकिन फायर करते समय रेंज और फायर पावर बढ़ा दी जाती है। सबसे पहले इस प्रकार का हथियार 1915 में इटली में बनाया गया। 1941 में ली इनफील्ड कम्पनी ने एस.एम.जी. का विकसित रूप (जो एच.जे. टर्निफ और आर.बी. विक्टर शेफर्ड ने विकसित किया) तैयार किया, इन तीनों (शेफर्ड, टर्निफ और इनफील्ड) के नाम पर इस हथियार का नाम STEN रखा गया।
कार्बाइन शब्द कैसे बना, इसके बारे में अलग-अलग विचार हैं, लेकिन सबसे पहले विश्व संधीय लेखक गेर्ज मेमोरी के अनुसार स्पेन की घुड़सवार सेना में छोटी बैरल व हल्की वजन का राइफलनुमा हथियार होता था, जिसको घोड़े की काठी में आसानी से छुपाया जा सकता था। इस घुड़सवार सेना के छोटे दस्ते को कार्बीनो कहते थे। यही कारण है कि बाद में सुधरते हुए रूप को कार्बाइन के नाम से जाना जाने लगा। कार्बाइन मशीन 1A SAF के तैयार हुए मॉडल स्टेन मार्क 4 तथा एल2 ए2, एस.एम.जी. का ही रूप है। कार्बाइन मशीन 9 एमएम 1A SAF भारत में स्माल आर्म फैक्टरी कानपुर में बनाया जाता है।
📜 विस्तृत इतिहास (Detailed History)
1960 के दशक में भारतीय सेना ने Sterling SMG का लाइसेंस लेकर भारत में उत्पादन शुरू किया। Ordnance Factory Kanpur में इसका बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ। 1965-66 में इसे भारतीय सेना में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 9mm CMG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। इसके बाद IPKF ऑपरेशन (श्रीलंका), कश्मीर घाटी, नॉर्थ-ईस्ट और विभिन्न अशांत क्षेत्रों में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स में यह हथियार लगातार सक्रिय रही।
VIP सुरक्षा, स्पेशल फोर्सेस और अर्धसैनिक बलों (BSF, CRPF, CISF, ITBP) में आज भी इसका व्यापक उपयोग होता है। हालांकि अब इसे DRDO की ASMI 9mm Carbine और JVPC से धीरे-धीरे रिप्लेस किया जा रहा है, लेकिन Reliability और आसान रखरखाव के कारण 9mm CMG अभी भी सेवा में बनी हुई है।
1. Body
Show Parts
• Barrel
• For Sight Assembly
• For Sight Protector
• For Sight Tip
• Back Sight Assembly
• Back Sight Protector
• Back Sight Lip
• Magzine Housing
• Magzine Catch
• Change Liver
• Trigger
• Trigger Guard
• Main Sear
• Additional Sear
• Ijection Slot
• Ejector
• Barrel Casing
• But
• But Tube
• But Frame
• Front Stoper
• Rear Stoper
• Body Cap
• Cocking Handle Way
2. Brich Block
Show Parts
• Herical Ribs
• Cocking Handle Way
• Ejector Way
• Extractor
• Feed Horn
• Seat For Cartridge
• Firing Pin
3. Spring
Show Parts
• Seat For Plunger
• Inner Spring
• Outer Spring
• Spring Guide
• Cap Housing
• Cocking Handle Way
4. Body Cap
Show Parts
• Body Cap Shoulder
• Rear Sling Kadi
• Drainage Hole
• Buffer
• Body Cap Locking Inner Thred
5. Magzine
Show Parts
• Long Curve
• Short Curve
• Bullet Guide
• Magzine Lips
• Roller
• Magzine Bottom Plate
| क्रम | विवरण | स्पेसिफिकेशन |
|---|---|---|
| 1 | कार्बाइन का पूरा नाम | 9 एमएम कार्बाइन मशीन 1A1 एस.ए.एफ. |
| 2 | कार्बाइन की लम्बाई | फोल्ड बट के साथ 19 इंच, खुले बट के साथ 27 इंच, बेनेट के साथ 35 इंच |
| 3 | बैरल की लम्बाई | 7.8 इंच |
| 4 | साइटिंग रेडियस | 16.1 इंच |
| 5 | मजल वेलोसिटी | 1280 फीट प्रति सेकण्ड |
| 6 | कारगर रेंज | 100 गज |
| 7 | मैगजीन क्षमता | 34 राउण्ड लेकिन 32 भरे जाते हैं |
| 8 | भरी मैगजीन के साथ वजन | 3.515 किलोग्राम |
| 9 | भरी मैगजीन व बेनेट के साथ वजन | 3.798 किलोग्राम |
| 10 | ग्रूव की संख्या | 6 ग्रूव |
| 11 | साइक्लिक रेट ऑफ फायर | 500 से 550 राउण्ड प्रति मिनट |
| 12 | सिद्धांत | ब्लो बैक विद ए.पी.आई. |
विशेषताएँ
- हल्का और छोटा हथियार होने की वजह से ले जाना आसान है।
- आकार छोटा होने की वजह से छुपाव आसान है।
- सिखाना व प्रयोग करना आसान है।
- इससे सिंगल और ऑटोमैटिक दोनों प्रकार का फायर किया जाता है।
- कम दूरी पर ऑटोमैटिक फायर करके एल.एम.जी जैसे फायर का प्रभाव डाला जा सकता है।
- गली, कूचे, तंग रास्ते, मोर्चे, भीड़ भरे इलाके और मकान आदि की तलाशी लेने में आसान है।
- नजदीक (सी.क्यू.बी.) की लड़ाई का खास हथियार है। इसमें बेनेट लगाकर भी प्रयोग किया जाता है।
कमियाँ
- मजल वेलोसिटी कम है।
- कारगर रेंज कम है।
- इसके अन्दर रोकें ज्यादा पड़ती है।
- केवल नजदीक की लड़ाई में ही प्रयोग में लाया जा सकता है।
5.56 mm INSAS RIFLE
INSAS Rifle
नमस्ते दोस्तों,
INSAS (Indian Small Arms System) भारतीय हथियार उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। यह भारत की पहली स्वदेशी असॉल्ट राइफल है जिसे पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों ने डिजाइन किया और भारत में ही बनाया गया।
INSAS एक 5.56 × 45 mm NATO कैलिबर की गैस-ऑपरेटेड, सेलेक्टिव फायर असॉल्ट राइफल है। इसे Indian Small Arms System के नाम से जाना जाता है। यह राइफल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम थी। 1980 के दशक में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना को विदेशी राइफलों (जैसे AK-47, M16) पर निर्भरता कम करना था।
- कैलिबर: 5.56 × 45 mm NATO
- एक्शन: Gas Operated, Rotating Bolt
- फायर मोड: Semi-automatic और Burst (3 राउंड)
- वजन: लगभग 4 किलो (खाली)
- कारगर रेंज : 400 मीटर
- मॅगझिन क्षमता : 20 या 30 राउंड
1982: भारतीय सेना ने नई राइफल की जरूरत महसूस की। पुरानी 7.62 mm SLR भारी और कम प्रभावी हो चुकी थी।
1985: DRDO (Defence Research and Development Organisation) और ARDE (Armament Research and Development Establishment) को INSAS प्रोजेक्ट सौंपा गया।
1990: INSAS का पहला प्रोटोटाइप तैयार हुआ।
1997: भारतीय सेना में आधिकारिक रूप से शामिल की गई।
1999: कारगिल युद्ध में पहली बार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुई।
2010–2020: कुछ तकनीकी समस्याओं (जैसे जाम होना, गर्म होना) की वजह से धीरे-धीरे AK-203, SIG 716 आदि से रिप्लेस की जा रही है।
मुख्य उत्पादन केंद्र:
- Rifle Factory Ishapore (West Bengal)
- Ordnance Factory Tiruchirappalli (TamilNadu)
- Small Arms Factory Kanpur
INSAS को पूरी तरह भारत में बनाया गया।
कुल मिलाकर लगभग 7 लाख से ज्यादा INSAS राइफलें विभिन्न वेरिएंट में बनाई गईं। यह भारत की पहली राइफल थी जिसमें Modular Design का इस्तेमाल किया गया, यानी अलग-अलग पार्ट्स को आसानी से बदल सकते थे।
Part's Name
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बॅरल (Barrel)
कॉकिंग हॅण्डल (Cocking Handle)
चेंज लिव्हर (Change liver)
ट्रिगर (Trigger)
ट्रिगर गार्ड (Trigger Guard)
बॅरल कॉलर (Barrel Coller)
अप्पर स्लिंग कडी (Upper sling kadi)
लोवर स्लिंग कडी (lower sling kadi)
अप्पर हँड गार्ड (Upper hand Guard)
लोवर (lower Hand Guard)
गॅस ट्यूब कॅच (Gas Tube Catch)
गॅस रेग्युलेटर (Gas Regulator)
गॅस ट्यूब (Gas Tube)
ग्रेनेड साईट (Granede Site)
कॅरिंग हॅण्डल (Carring Handle)
इजेक्शन स्लॉट (Ijection Slot)
बॉडी कव्हर (Body Cover)
डवटेल साईट(Dove Tel site)
फोर साईट असेंबली (Foresite Assembly)
फोर साईट प्रोटेक्टर (foresight Protector)
फोर साईट टीप (foresight tip)
बॅक साईट असेंबली (backside Assembly)
बॅक साईट प्रोटेक्टर (backside Protector)
बॅक साईट लिप (backside lip)
बॅक साईट ऑफ आप्रेचर (backside aprachar)
मॅक्झिन हाऊसिंग (Magazine Housing)
मॅक्झिम कॅच (Magazine Catch)
बट (Butt)
स्मॉल ऑफ द बट (Small of the Butt)
बट प्लेट (Butt Plate)
बट ट्रिप (But trip)
सेफ्टी सीअर (Safety sear)
ट्रिगर सीअर (Trigger Sear)
ऑक्झिलरीस सीअर (Auxiliary Sear)
हॅमर (Hammer)
रिटेनर गाईड रेसेस(Retainer Guide Recess)
रिटेनर वे (Retainer Way)
फ्लॅश एलिमिनेटर (Flash eliminator)
मजल अटॅचमेंट(Muzzle Attachment)
पिस्टल ग्रीप (Pistol Grip)
HOD( Holding Opening Device)
Long curve
Small curve
Bottom plate
Spring
Platform
Bottom plate Stud
Stopper
Stud
Piston head
Piston threats
Piston Joint
Resses for Body Guide
Ejector Way
Kem way
Piston rod
Kem way
Rotating Bolt way
Recoil spring housing
Stem
Bearing Surface
safety sear releaser
kem
Locking Lug
Firing Pin Bush hole
Feed Piece
Extractor
Firing Pin Retainer
Firing pin
Seat for cartridge
Rear stoper
Ritener
Front Guide
RearGuide
Retainer Guide
Technical Data
| विवरण (Description) | स्पेसिफिकेशन (Specifications) |
|---|---|
| कैलिबर (Calibre) | 5.56 mm |
| एक्शन (Action) | Gas Operated |
| फायरिंग मोड | Semi-Automatic & 3-Round Burst |
| रेट ऑफ फायर (Cyclic) | 600–650 राउंड प्रति मिनट |
| रेट ऑफ फायर (Normal) | 60 राउंड प्रति मिनट |
| Muzzle Velocity | 900 m/s |
| कारगर रेंज | 400 मीटर |
| Maximum Range | 1,000 मीटर |
| वजन (Weight) | 4.018 किलो (खाली, बिना मैगजीन) |
| खाली मैगजीन वजन | 90 gm |
| वजन खाली मैगजीन के साथ | 4.108 kg |
| भरी मैगजीन के साथ | 4.373 kg |
| लंबाई (Length) | 960 mm |
| पीच | 200 mm |
| बेनेट के साथ लंबाई | 1110 mm |
| Magazine Capacity | 20 राउंड |
| कारतूस | 5.56×45 mm |
| Rifling | 6 Grooves (Right Hand Twist) |
| Change Lever | Safe - Semi - Burst |
| बेनेट की लंबाई | 285 mm |
| बेनेट का किस्म | Multi purpose |
| बैरल की लंबाई | 464 mm |
| Sighting Radius | 470 mm |
| सिद्धांत | Long stroke Piston operated Gas Operation |
Classification
INSAS एक परिवार (family weapon) है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित वेरिएंट बनाए गए:
- INSAS assault rifles
- INSAS LMG
- INSAS excalibur
- हल्की और आसान हैंडलिंग
- अच्छी एक्यूरेसी (निशानेबाजी)
- स्वदेशी उत्पादन → सस्ती और आसानी से पार्ट्स उपलब्ध
- ठंडे मौसम में जाम होने की समस्या
- लंबे समय तक फायरिंग करने पर ओवरहीटिंग
- Burst mode में कंट्रोल मुश्किल
5.56 INSAS RIFLE Part's Name
7.62 mm Self Loading Rifle
7.62 mm Self Loading Rifle (SLR) भारतीय सेना की उन दिग्गज राइफलों में से एक है जिसने 1960 के दशक से 1990 के दशक तक भारतीय सैनिकों की रीढ़ की हड्डी का काम किया। इसे Ishapore 1A1 या Rifle 7.62 mm 1A1 के नाम से भी जाना जाता है। यह राइफल बेल्जियन FN FAL (Fusil Automatique Léger) का भारतीय संस्करण है, लेकिन इसमें ब्रिटिश L1A1 SLR और कुछ मेट्रिक पैटर्न के तत्वों का अनोखा मिश्रण है।
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना को महसूस हुआ कि पुरानी .303 Lee-Enfield बोल्ट एक्शन राइफल अब आधुनिक युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है। सेना को एक सेमी-ऑटोमैटिक राइफल की जरूरत थी जो ज्यादा पावरफुल और विश्वसनीय हो। भारतीय सेना ने 7.62×51 mm NATO कैलिबर को अपनाने का फैसला किया। मूल रूप से बेल्जियन FN FAL राइफल को चुना गया, जो उस समय दुनिया की सबसे बेहतरीन बैटल राइफलों में से एक थी। भारत ने FN कंपनी से लाइसेंस लेने की कोशिश की, लेकिन FN ने रॉयल्टी और बेल्जियन टेक्निशियंस की शर्तें रखीं, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद Armament Research & Development Establishment (ARDE) और Rifle Factory Ishapore के इंजीनियरों ने उपलब्ध FN FAL और ब्रिटिश L1A1 SLR राइफलों को रिवर्स इंजीनियरिंग करके अपना खुद का संस्करण तैयार किया। परिणामस्वरूप Ishapore 1A1 SLR बनी, जो इंच पैटर्न (ब्रिटिश) और मेट्रिक पैटर्न (बेल्जियन) का हाइब्रिड थी। इसमें Lee-Enfield स्टाइल का बट प्लेट भी शामिल किया गया।
उत्पादन 1963-64 में शुरू हुआ और Rifle Factory Ishapore तथा Ordnance Factory Tiruchirappalli में बनाई गई। एक समय में 750 राइफल्स प्रति सप्ताह का उत्पादन होता था। कुल मिलाकर लगभग 10 लाख से ज्यादा SLR राइफल्स भारत में बनीं।
- पूर्ण नाम: Rifle 7.62 mm 1A1 (Ishapore SLR)
- कैलिबर: 7.62 × 51 mm NATO
- एक्शन: Gas Operated, Tilting Breech Block (सेमी-ऑटोमैटिक)
- खासियत: बहुत मजबूत, reliable और उच्च stopping power वाली राइफल। कठिन मौसम और लंबे इस्तेमाल में भी बेहतरीन परफॉर्मेंस।
- 1963-64 से भारतीय सेना में शामिल हुई।
- यह राइफल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी भारतीय सैनिकों के साथ रही और अच्छा प्रदर्शन किया।
- 1990 के अंत तक मुख्य राइफल रही।
- 1998 से धीरे-धीरे 5.56 mm INSAS राइफल से रिप्लेस की गई।
- आज भी कुछ Central Armed Police Forces (CAPF), राज्य पुलीस बल, NCC और parades में इसका इस्तेमाल होता है।
| 🔥 Technical Specifications | |
|---|---|
| कैलिबर (Calibre) | 7.62 mm |
| कारतूस (Cartridge) | 7.62×51mm NATO |
| सिद्धांत (Principle) | Short stroke piston operated Gas Operation (Semi-automatic) |
| लंबाई (Length - Normal Butt) | 44.85 inch (1139 mm) |
| लंबाई (Length - Short Butt) | 44.35 inch (1126 mm) |
| लंबाई (Length - Long Butt) | 45.35 inch (1152 mm) |
| बेनेट के साथ (With Bayonet) | 55 inch (1397 mm) |
| वजन (Weight - बिना मैगजीन) | 4.4 kg |
| खाली मैगजीन के साथ | 4.655 kg |
| खाली मैगजीन का वजन | 255 gm |
| भरी मैगजीन का वजन | 709 gm |
| भरी मैगजीन के साथ | 5.1 kg |
| बेनेट का वजन (Bayonet Weight) | 283 gm |
| बैरेल की लंबाई (Barrel Length) | 534 mm (21 inch) |
| साइटिंग रेडियस (Sighting Radius) | 553 mm (21.77 inch) |
| मजल वेलोसिटी (Muzzle Velocity) | 815 m/s (2700 ft/s) |
| कारगर रेंज (Effective Range) | 300 yards |
| मैगजीन क्षमता (Magazine Capacity) | 20 rounds |
| रेट ऑफ फायर (Rate of Fire) | Semi-auto (20–60 rounds/min) |
| ग्रूव्स (Grooves) | 6 grooves (Right twist) |
| पिच (Pitch) | 12 inch |
| सुखी चिंदी | 4×2 inch |
| तेल वाली चिंदी | 4×1.5 inch |
| अधिकृत गोला-बारूद (Authorized Ammunition) | 100 rounds & 5 magazines |
7.62 mm SLR रायफल का खोलना और जोडना.
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पार्टस् ड्रेसिंग
7.62 mm SLR Rifle Part's Name 👇
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Type of Target (टार्गेट के प्रकार)
Two Types of Target
1. कुदरती टार्गेट (Natural Target)
2. बनावटी टार्गेट (Artificial Target)
A. रेंज टार्गेट
a. ॲप्लिकेशन टार्गेट
b. गृपिंग टार्गेट
B. फिगर टार्गेट
a. फिगर 11
b. फिगर 12
c. फिगर 13.
d. (Close Quarters Battle)
Fire Arm's safety Rule's
🔥 Firearm Safety Rules
हथियार हैंडलिंग के 5 Golden Rules
हर Beginner को याद रखने चाहिए
(W.M.T.T.S)
नमस्ते दोस्तों,
Weapon Training की सबसे महत्वपूर्ण बात Safety है। चाहे आप beginner हों या experienced shooter, हथियार से जुड़े हर काम में ये 5 नियम कभी नहीं भूलने चाहिए। ये नियम दुनिया भर में मान्य हैं और भारत के सभी licensed shooting ranges में सख्ती से सिखाए जाते हैं।इन्हें हमेशा याद रखें — क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
🔰 Firearm Safety के 5 Golden Rules (W.M.T.T.S)
1. Weapon हमेशा Loaded समझें
हर हथियार को हमेशा लोडेड मानकर हैंडल करें। "खाली है" कभी मत सोचें।
2. Muzzle (Barrel)हमेशा सुरक्षित दिशा में रखें
हथियार का बॅरल कभी किसी इंसान या अनचाहे लक्ष्य की तरफ न घुमाएं।
3. Trigger Discipline (ट्रिगर अनुशासन)
ट्रिगर पर उंगली तब तक न रखें जब तक जरुरत न हों या आदेश ना मिले।
4. Target Discipline (टारगेट अनुशासन)
शूट करने से पहले पक्का कर लें कि टारगेट क्या है और उसके पीछे क्या है।
5. Safety Catch On (सुरक्षा कैच S पर)
इस्तेमाल न करते समय Safety Catch को "S" (Safe) पोजीशन पर रखें।
इन 5 नियमों का पालन क्यों जरूरी है?
ये 5 नियम accidental discharge (अचानक गोली छूटने) को लगभग असंभव बना देते हैं। ज्यादातर हादसे इन्हीं नियमों को न मानने की वजह से होते हैं।
प्रैक्टिकल टिप: हर बार हथियार हाथ में लेते समय इन 5 नियमों को मन में दोहराएं। Dry practice में भी इनका पालन करें।
निष्कर्ष
हथियार कोई खिलौना नहीं है।
Safety Rules का सख्ती से पालन करना हर Shooter की पहली जिम्मेदारी है।
Disclaimer: यह पोस्ट केवल educational और safety awareness के लिए है। हम किसी भी illegal activity को promote नहीं करते। भारत में हथियार रखने और इस्तेमाल करने के लिए Arms Act 1959 के अनुसार लाइसेंस जरूरी है। हमेशा licensed shooting range और certified trainer के साथ ट्रेनिंग लें।
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