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9mm AUTO PISTOL

 



9mm CARBINE MACHINE GUN (CMG)

 


📌 परिचय (Introduction)

9mm Carbine Machine Gun (CMG) भारतीय सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों मे प्रधान आरक्षण/ हवालदार का यक्तीगत हाथीयार है. ये ब्लो बॅक के सिद्धांत पर काम करता है. लंबे समय से सेवा दे रही हथियार है। यह मुख्य रूप से क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB), VIP सुरक्षा, कमांडो ऑपरेशन्स और अंदरूनी सुरक्षा ड्यूटी के लिए इस्तेमाल की जाती है।

यह हथियार ब्रिटिश Sterling Submachine Gun का भारतीय लाइसेंस उत्पादन संस्करण है, जिसे भारतीय सेना में 9mm 1A1 Carbine नाम से जाना जाता है। अपनी compact size, reliability और 9mm Parabellum कारतूस की अच्छी मारक क्षमता के कारण यह कई दशकों तक भारतीय बलों की पसंदीदा हथियार रही है।

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• Specifications •

1. Body

Show Parts

• Barrel

• For Sight Assembly

• For Sight Protector

• For Sight Tip

• Back Sight Assembly

• Back Sight Protector

• Back Sight Lip

• Magzine Housing

• Magzine Catch

• Change Liver

• Trigger

• Trigger Guard

• Main Sear

• Additional Sear

• Ijection Slot

• Ejector

• Barrel Casing

• But

• But Tube

• But Frame

• Front Stoper

• Rear Stoper

• Body Cap

• Cocking Handle Way

2. Brich Block

Show Parts

• Herical Ribs

• Cocking Handle Way

• Ejector Way

• Extractor

• Feed Horn

• Seat For Cartridge

• Firing Pin

3. Spring

Show Parts

• Seat For Plunger

• Inner Spring

• Outer Spring

• Spring Guide

• Cap Housing

• Cocking Handle Way

4. Body Cap

Show Parts

• Body Cap Shoulder

• Rear Sling Kadi

• Drainage Hole

• Buffer

• Body Cap Locking Inner Thred

5. Magzine

Show Parts

• Long Curve

• Short Curve

• Bullet Guide

• Magzine Lips

• Roller

• Magzine Bottom Plate

क्रम विवरण स्पेसिफिकेशन
1 कार्बाइन का पूरा नाम 9 एमएम कार्बाइन मशीन 1A1 एस.ए.एफ.
2 कार्बाइन की लम्बाई फोल्ड बट के साथ 19 इंच, खुले बट के साथ 27 इंच, बेनेट के साथ 35 इंच
3 बैरल की लम्बाई 7.8 इंच
4 साइटिंग रेडियस 16.1 इंच
5 मजल वेलोसिटी 1280 फीट प्रति सेकण्ड
6 कारगर रेंज 100 गज
7 मैगजीन क्षमता 34 राउण्ड लेकिन 32 भरे जाते हैं
8 भरी मैगजीन के साथ वजन 3.515 किलोग्राम
9 भरी मैगजीन व बेनेट के साथ वजन 3.798 किलोग्राम
10 ग्रूव की संख्या 6 ग्रूव
11 साइक्लिक रेट ऑफ फायर 500 से 550 राउण्ड प्रति मिनट
12 सिद्धांत ब्लो बैक विद ए.पी.आई.

विशेषताएँ

  • हल्का और छोटा हथियार होने की वजह से ले जाना आसान है।
  • आकार छोटा होने की वजह से छुपाव आसान है।
  • सिखाना व प्रयोग करना आसान है।
  • इससे सिंगल और ऑटोमैटिक दोनों प्रकार का फायर किया जाता है।
  • कम दूरी पर ऑटोमैटिक फायर करके एल.एम.जी जैसे फायर का प्रभाव डाला जा सकता है।
  • गली, कूचे, तंग रास्ते, मोर्चे, भीड़ भरे इलाके और मकान आदि की तलाशी लेने में आसान है।
  • नजदीक (सी.क्यू.बी.) की लड़ाई का खास हथियार है। इसमें बेनेट लगाकर भी प्रयोग किया जाता है।

कमियाँ

  • मजल वेलोसिटी कम है।
  • कारगर रेंज कम है।
  • इसके अन्दर रोकें ज्यादा पड़ती है।
  • केवल नजदीक की लड़ाई में ही प्रयोग में लाया जा सकता है।

5.56 mm INSAS RIFLE


INSAS Rifle

भारतीय सेना की पहली स्वदेशी असॉल्ट राइफल – इतिहास, परिचय, निर्माण और वर्गीकरण

नमस्ते दोस्तों,

INSAS (Indian Small Arms System) भारतीय हथियार उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। यह भारत की पहली स्वदेशी असॉल्ट राइफल है जिसे पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों ने डिजाइन किया और भारत में ही बनाया गया।

1. INSAS Rifle का परिचय (Introduction)

INSAS एक 5.56 × 45 mm NATO कैलिबर की गैस-ऑपरेटेड, सेलेक्टिव फायर असॉल्ट राइफल है। इसे Indian Small Arms System के नाम से जाना जाता है। यह राइफल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम थी। 1980 के दशक में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना को विदेशी राइफलों (जैसे AK-47, M16) पर निर्भरता कम करना था।

मुख्य विशेषताएँ:
  • कैलिबर: 5.56 × 45 mm NATO
  • एक्शन: Gas Operated, Rotating Bolt
  • फायर मोड: Semi-automatic और Burst (3 राउंड)
  • वजन: लगभग 4 किलो (खाली)
  • कारगर रेंज : 400 मीटर
  • मॅगझिन क्षमता : 20 या 30 राउंड
2. INSAS Rifle का इतिहास (History)

1982: भारतीय सेना ने नई राइफल की जरूरत महसूस की। पुरानी 7.62 mm SLR भारी और कम प्रभावी हो चुकी थी।

1985: DRDO (Defence Research and Development Organisation) और ARDE (Armament Research and Development Establishment) को INSAS प्रोजेक्ट सौंपा गया।

1990: INSAS का पहला प्रोटोटाइप तैयार हुआ।

1997: भारतीय सेना में आधिकारिक रूप से शामिल की गई।

1999: कारगिल युद्ध में पहली बार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुई।

2010–2020: कुछ तकनीकी समस्याओं (जैसे जाम होना, गर्म होना) की वजह से धीरे-धीरे AK-203, SIG 716 आदि से रिप्लेस की जा रही है।

3. INSAS Rifle का निर्माण (Manufacturing / Production)

मुख्य उत्पादन केंद्र:

  • Rifle Factory Ishapore (West Bengal)
  • Ordnance Factory Tiruchirappalli (TamilNadu)
  • Small Arms Factory Kanpur

INSAS को पूरी तरह भारत में बनाया गया।

कुल मिलाकर लगभग 7 लाख से ज्यादा INSAS राइफलें विभिन्न वेरिएंट में बनाई गईं। यह भारत की पहली राइफल थी जिसमें Modular Design का इस्तेमाल किया गया, यानी अलग-अलग पार्ट्स को आसानी से बदल सकते थे।

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Specifications 

Part's Name

Click here for detail 👇

⏬ बॉडी (Body)
⏬ मॅगझीन(Magazine)
⏬ पिस्टन एक्सटेंशन(Piston Extension)
⏬ रोटेटिंग बोल्ट(Rotating Bolt/brich block)
⏬ रिक्वायल स्प्रिंग(Recoil Spring)

INSAS Rifle खोलना-जोडना

INSAS Rifle Striping/Assemble Video




Part's Dressing 



5.56 INSAS RIFLE Part's Name


हथियार की सफाई
राईफल के बट ट्रिप के अन्दर से पुलथ्रू और ऑयल बोतल को निकालो। जरूरी है कि पुलथ्रू को इस्तेमाल करने से पहले पुलथ्रू की ताकत को चेक कर लिया जाये और अपनी हथेली की उंगलियों से गुजर लिया जाये ताकि पता चल सके कि पुलथ्रू में कोई गांठ वगैरह तो नही है। राईफल को साफ करने के लिए निम्नलिखित टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन्सास रायफल का बॅरल साफ करने के लिये सुखी चींदी का नाप 4*1.5 इंच तथा तेल वाली चींदी का नाप 4*1 इंच होता है.
1
ऑयल बाटल
2
पुलथ्रू
3
चिन्दी
4
चैम्बर क्लिनिंग ब्रश
5
बैरल क्लिनिंग रॉड
6
केस रिमूविंग टूल
7
ड्रिफ्ट
8
बैरल क्लिनिंग ब्रश
9
टूल एडजस्टिंग फोर एंड बैक साइट

7.62 mm Self Loading Rifle


7.62 mm SLR परिचय,उत्पत्ती,विशेषताएँ

SLR परिचय 

7.62 mm Self Loading Rifle (SLR) भारतीय सेना की उन दिग्गज राइफलों में से एक है जिसने 1960 के दशक से 1990 के दशक तक भारतीय सैनिकों की रीढ़ की हड्डी का काम किया। इसे Ishapore 1A1 या Rifle 7.62 mm 1A1 के नाम से भी जाना जाता है। यह राइफल बेल्जियन FN FAL (Fusil Automatique Léger) का भारतीय संस्करण है, लेकिन इसमें ब्रिटिश L1A1 SLR और कुछ मेट्रिक पैटर्न के तत्वों का अनोखा मिश्रण है।

SLR की उत्पत्ति (Origin)

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना को महसूस हुआ कि पुरानी .303 Lee-Enfield बोल्ट एक्शन राइफल अब आधुनिक युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है। सेना को एक सेमी-ऑटोमैटिक राइफल की जरूरत थी जो ज्यादा पावरफुल और विश्वसनीय हो। भारतीय सेना ने 7.62×51 mm NATO कैलिबर को अपनाने का फैसला किया। मूल रूप से बेल्जियन FN FAL राइफल को चुना गया, जो उस समय दुनिया की सबसे बेहतरीन बैटल राइफलों में से एक थी। भारत ने FN कंपनी से लाइसेंस लेने की कोशिश की, लेकिन FN ने रॉयल्टी और बेल्जियन टेक्निशियंस की शर्तें रखीं, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया।

इसके बाद Armament Research & Development Establishment (ARDE) और Rifle Factory Ishapore के इंजीनियरों ने उपलब्ध FN FAL और ब्रिटिश L1A1 SLR राइफलों को रिवर्स इंजीनियरिंग करके अपना खुद का संस्करण तैयार किया। परिणामस्वरूप Ishapore 1A1 SLR बनी, जो इंच पैटर्न (ब्रिटिश) और मेट्रिक पैटर्न (बेल्जियन) का हाइब्रिड थी। इसमें Lee-Enfield स्टाइल का बट प्लेट भी शामिल किया गया।

उत्पादन 1963-64 में शुरू हुआ और Rifle Factory Ishapore तथा Ordnance Factory Tiruchirappalli में बनाई गई। एक समय में 750 राइफल्स प्रति सप्ताह का उत्पादन होता था। कुल मिलाकर लगभग 10 लाख से ज्यादा SLR राइफल्स भारत में बनीं।

SLR का परिचय और मुख्य विशेषताएँ
  • पूर्ण नाम: Rifle 7.62 mm 1A1 (Ishapore SLR)
  • कैलिबर: 7.62 × 51 mm NATO
  • एक्शन: Gas Operated, Tilting Breech Block (सेमी-ऑटोमैटिक)
  • खासियत: बहुत मजबूत, reliable और उच्च stopping power वाली राइफल। कठिन मौसम और लंबे इस्तेमाल में भी बेहतरीन परफॉर्मेंस।
सेवा में इतिहास
  • 1963-64 से भारतीय सेना में शामिल हुई।
  • यह राइफल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी भारतीय सैनिकों के साथ रही और अच्छा प्रदर्शन किया।
  • 1990 के अंत तक मुख्य राइफल रही।
  • 1998 से धीरे-धीरे 5.56 mm INSAS राइफल से रिप्लेस की गई।
  • आज भी कुछ Central Armed Police Forces (CAPF), राज्य पुलीस बल, NCC और parades में इसका इस्तेमाल होता है।
 


🔥 Technical Specifications
कैलिबर (Calibre)7.62 mm
कारतूस (Cartridge)7.62×51mm NATO
सिद्धांत (Principle)Short stroke piston operated Gas Operation (Semi-automatic)
लंबाई (Length - Normal Butt)44.85 inch (1139 mm)
लंबाई (Length - Short Butt)44.35 inch (1126 mm)
लंबाई (Length - Long Butt)45.35 inch (1152 mm)
बेनेट के साथ (With Bayonet)55 inch (1397 mm)
वजन (Weight - बिना मैगजीन)4.4 kg
खाली मैगजीन के साथ4.655 kg
खाली मैगजीन का वजन255 gm
भरी मैगजीन का वजन709 gm
भरी मैगजीन के साथ5.1 kg
बेनेट का वजन (Bayonet Weight)283 gm
बैरेल की लंबाई (Barrel Length)534 mm (21 inch)
साइटिंग रेडियस (Sighting Radius)553 mm (21.77 inch)
मजल वेलोसिटी (Muzzle Velocity)815 m/s (2700 ft/s)
कारगर रेंज (Effective Range)300 yards
मैगजीन क्षमता (Magazine Capacity)20 rounds
रेट ऑफ फायर (Rate of Fire)Semi-auto                          (20–60 rounds/min)
ग्रूव्स (Grooves)6 grooves (Right twist)
पिच (Pitch)12 inch
सुखी चिंदी 4×2 inch
तेल वाली चिंदी 4×1.5 inch
अधिकृत गोला-बारूद (Authorized Ammunition)100 rounds & 5 magazines


7.62 mm SLR रायफल का खोलना और जोडना.

👇 नीचे video में पूरा process देखें



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पार्टस् ड्रेसिंग 




7.62 mm SLR Rifle Part's Name 👇


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हथियार की सफाई
राईफल के बट ट्रिप के अन्दर से पुलथ्रू और ऑयल बोतल को निकालो। जरूरी है कि पुलथ्रू को इस्तेमाल करने से पहले पुलथ्रू की ताकत को चेक कर लिया जाये और अपनी हथेली की उंगलियों से गुजर लिया जाये ताकि पता चल सके कि पुलथ्रू में कोई गांठ वगैरह तो नही है। राईफल को साफ करने के लिए निम्नलिखित टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। SLR रायफल का बॅरल साफ करने के लिये सुखी चींदी का नाप 4*2 इंच होता है तथा तेल वाली चींदी का नाप 4*1.5 इंच होता है|
1
ऑयल बाटल
2
पुलथ्रू
3
चिन्दी
4
चैम्बर क्लिनिंग ब्रश
5
बैरल क्लिनिंग रॉड
6
केस रिमूविंग टूल
7
ड्रिफ्ट
8
बैरल क्लिनिंग ब्रश
9
टूल एडजस्टिंग फोर एंड बैक साइट

Type of Target (टार्गेट के प्रकार)

Two Types of Target 

1. कुदरती टार्गेट (Natural Target)

2. बनावटी टार्गेट (Artificial Target)

     A. रेंज टार्गेट 

                      a. ॲप्लिकेशन टार्गेट

 

                       b. गृपिंग टार्गेट 


     B. फिगर टार्गेट

                       a. फिगर 11  


                          b. फिगर 12 



                       c. फिगर 13.           



             d. (Close Quarters Battle)

                       

                         e. Rubia Target 


Aiming Point/Point of Aim:- वह विशिष्ट बिंदु है जिस पर आप निशाना लगाते हैं (POA).
Point of Impact (POI):- का मतलब वह सटीक स्थान या बिंदु है, जहाँ निशाना साधकर चलाई गई गोली (projectile) लक्ष्य (Target) से टकराती है। यह शूटिंग की सटीकता और ग्रुपिंग को मापने का आधार है।
(मूल अंतर: एमिंग पॉइंट (POA) निशाना साधने की जगह है, जबकि पॉइंट ऑफ इम्पैक्ट (POI) गोली लगने की जगह है।)
Mean Point of Impact (MPI):- जब एक ही लक्ष्य पर लगातार कई गोलियां चलाई जाती हैं, तो उन गोलियों के टकराने वाले क्षेत्र (grouping) का जो केंद्रीय बिंदु (Center Point) होता है, उसे MPI कहते हैं।
जीरोइंग (Zeroing):- जब POI और POA एक ही बिंदु पर मिल जाते हैं, तो उसे 'जीरो' होना कहते हैं।
ऍप्लिकेशन फायर:- ग्रुप के MPI को टारगेट के सेंटर मे लाने के लिये जो फायर किया जाता है उसे ऍप्लिकेशन फायर कहते हैं.
गृपींग फायर:- एक ही फायरर, एक ही रायफल से, एक ही रेंज पर, एक ही मौसम मे, एक ही रेंज से, एक ही टार्गेट पर 2 या 2 से अधिक राऊंड फायर करता है, उससे बनने वाले समूह को ग्रूपिंग फायर कहते हैं..
 








Fire Arm's safety Rule's

🔥 Firearm Safety Rules

हथियार हैंडलिंग के 5 Golden Rules

हर Beginner को याद रखने चाहिए

(W.M.T.T.S)


नमस्ते दोस्तों,

Weapon Training की सबसे महत्वपूर्ण बात Safety है। चाहे आप beginner हों या experienced shooter, हथियार से जुड़े हर काम में ये 5 नियम कभी नहीं भूलने चाहिए। ये नियम दुनिया भर में मान्य हैं और भारत के सभी licensed shooting ranges में सख्ती से सिखाए जाते हैं।इन्हें हमेशा याद रखें — क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

🔰 Firearm Safety के 5 Golden Rules (W.M.T.T.S)

1. Weapon हमेशा Loaded समझें
हर हथियार को हमेशा लोडेड मानकर हैंडल करें। "खाली है" कभी मत सोचें।

2. Muzzle (Barrel)हमेशा सुरक्षित दिशा में रखें
हथियार का बॅरल कभी किसी इंसान या अनचाहे लक्ष्य की तरफ न घुमाएं।

3. Trigger Discipline (ट्रिगर अनुशासन)
ट्रिगर पर उंगली तब तक न रखें जब तक जरुरत न हों या आदेश ना मिले।

4. Target Discipline (टारगेट अनुशासन)
शूट करने से पहले पक्का कर लें कि टारगेट क्या है और उसके पीछे क्या है।

5. Safety Catch On (सुरक्षा कैच S पर)
इस्तेमाल न करते समय Safety Catch को "S" (Safe) पोजीशन पर रखें।

इन 5 नियमों का पालन क्यों जरूरी है?

ये 5 नियम accidental discharge (अचानक गोली छूटने) को लगभग असंभव बना देते हैं। ज्यादातर हादसे इन्हीं नियमों को न मानने की वजह से होते हैं।

प्रैक्टिकल टिप: हर बार हथियार हाथ में लेते समय इन 5 नियमों को मन में दोहराएं। Dry practice में भी इनका पालन करें।

निष्कर्ष

हथियार कोई खिलौना नहीं है।
Safety Rules का सख्ती से पालन करना हर Shooter की पहली जिम्मेदारी है।


Disclaimer: यह पोस्ट केवल educational और safety awareness के लिए है। हम किसी भी illegal activity को promote नहीं करते। भारत में हथियार रखने और इस्तेमाल करने के लिए Arms Act 1959 के अनुसार लाइसेंस जरूरी है। हमेशा licensed shooting range और certified trainer के साथ ट्रेनिंग लें।